वाराणसी, अप्रैल 26 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। 'प्राच्य अध्ययन में अहिंसा' तथा 'चिन्मय गुरुदेव' नामक ग्रंथ केवल पुस्तकें नहीं हैं। यह भारतीय ज्ञान-संस्कृति के ऐसे दीपस्तम्भ हैं, जो वैश्विक स्तर पर शांति, सहअस्तित्व और अध्यात्म का आलोक प्रसारित करने में सक्षम हैं। ये बातें संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहीं। उन्होंने कुलपति कक्ष में इन दोनों पुस्तकों का शनिवार को विमोचन किया। प्रो. शर्मा ने कहा कि इन ग्रंथों में संस्कृत, प्राकृत एवं पालि वांग्मय के आलोक में अहिंसा के सार्वकालिक और सार्वभौमिक स्वरूप का अत्यंत प्रामाणिक प्रतिपादन हुआ है। ये ग्रंथ गुरुतत्त्व के गूढ़ विमर्श से लेकर जैन परंपरा के विविध आयामों को अत्यंत सारगर्भित ढंग से प्रस्तुत करते हैं। यह भी पढ़ें- 'शिक्षा का उद्देश्य, मार्कशीट और रोजग...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.