दरभंगा, मार्च 30 -- दरभंगा। जैन दर्शन का उदय भारतीय उपमहाद्वीप में हुआ और इसकी शिक्षाएं आज भी विश्व भर में प्रासंगिक हैं। जैन दर्शन के मानने वाले अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह के पांच महाव्रतों का पालन करते हैं। लनामिवि के दर्शनशास्त्र विभाग में महावीर जयंती की पूर्व संध्या पर आधुनिक परिप्रेक्ष्य में जैन दर्शन की प्रासंगिकता विषय पर आयोजित संगोष्ठी में पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. अमर नाथ झा ने ये बातें कही। प्रो. झा ने कहा कि ये महाव्रत व्यक्तिगत एवं समाजिक जीवन में आदर्श जीवनशैली की नींव के रूप में महत्वपूर्ण हैं। जैन दर्शन की शिक्षाएं व्यक्ति को आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाती हैं और समाज में अहिंसा और शांति के महत्व को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य को संसार मे विकास के लिए जीना चाहिए। जिओ और जीने दो के सिद्धांत पर आ...
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