रांची, मई 21 -- सिल्ली, प्रतिनिधि। सिल्ली के पतराहातु में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद भागवत पुराण कथा महोत्सव के छठे दिन कंस वध, रुक्मिणी विवाह के प्रसंग पर गुरु चैतन्य हरि चरत जी महराज ने प्रवचन किया।

प्रवचन का महत्व उन्होंने कहा कि भागवत पुराण में जीवन जीने की कला का रहस्य छिपा हुआ है। प्रभु श्रीकृष्ण की लीला आज के समाज के लिए बड़ा ही प्रासंगिक है। भगवान ने अपने लीलाओं ने माध्यम से समाज के लिए एक आदर्श प्रस्तुत किया है। आज समाज में गुरु और शिष्य के बीच ने मूल्य समाप्त हो रहे है। लेकिन श्रीकृष्ण 64 कलाओं के ज्ञाता होते हुए भी गुरु संदीपनी ने शिक्षा ली। अपने गुरु का सम्मान किया।

आदर्श प्रस्तुत करना कई बार लोग अपने सगे संबंधियों की गलतियों पर पर्दा डालकर निर्दोष पर दोषारोपण कर देते है। लेकिन प्रभु ने अपने मामा कंस का वध करके यह आदर्श प्रस्त...