इटावा औरैया, अप्रैल 16 -- जसवंतनगर। क्षेत्र के बलरई गांव स्थित मोहल्ला विकास नगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन आचार्य ब्रजेश कुमार द्विवेदी ने रुक्मिणी विवाह और सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि रुक्मिणी ने भगवान श्रीकृष्ण को मन ही मन अपना पति स्वीकार कर लिया था। जब उनके भाई ने उनका विवाह शिशुपाल से तय किया, तब रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को संदेश भेजा। इसके बाद भगवान कृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर विधि-विधान से विवाह किया। यह प्रसंग सच्चे प्रेम और अटूट विश्वास का प्रतीक है। सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता निष्कपट प्रेम और समर्पण की मिसाल है। यह भी पढ़ें- श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन रास पंचायत और गोपी लीला का वर्णन निर्धन सुदामा जब द्वारिका पहुंचे तो भगवान कृष्ण ने उ...