सहरसा, मार्च 10 -- कहरा, एक संवाददाता। बनगांव कुटी परिसर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है। कथा के दौरान पूज्य व्यासानन्द जी महाराज ने उपस्थित सत्संग प्रेमियों को संबोधित करते हुए कहा कि "मानुष जन्म दुर्लभ है, मिले न बारंबार।" यह मानव जीवन केवल भोग-विलास के लिए नहीं, बल्कि साधना और प्रभु भक्ति के लिए मिला है। उन्होंने बताया कि महारास का वास्तविक अर्थ काम-वासना नहीं, बल्कि जीवात्मा का परमात्मा से मिलन है और गोपियां शुद्ध भक्ति का प्रतीक हैं। स्वामी जी ने कहा कि भक्ति के मार्ग में अहंकार सबसे बड़ी बाधा है, इसलिए इसका त्याग आवश्यक है। कथा के दौरान कंस वध और मथुरा गमन प्रसंग में अक्रूर जी के आगमन तथा कृष्ण-बलराम के मथुरा प्रस्थान का सुंदर वर्णन किया गया। साथ ही उन्होंने लोगों से सात्विक जीवन जीने और ब...