मुरादाबाद, अप्रैल 4 -- नगलिया जट के शिव मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन कथा व्यास आरती शास्त्री ने श्री कृष्ण और भक्त सुदामा की मित्रता के प्रसंग की विस्तार से व्याख्या की। उन्होंने कहा कि आज मित्रता के दौरान अधिकतर लोग अपना स्वार्थ साधने से नहीं चूकते गद्दारी के कारण संबंधों में बिगाड़ हो जाता है। उन्होंने बताया कि गुरु से कपट और मित्र से चोरी कभी नहीं करनी चाहिए इसका भयंकर प्रणाम भोगना पड़ता है। परंतु एक राजा और दूसरा रंक ऐसे में राजा ने पूरी दुनिया के समक्ष एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया कि मित्रता में कोई बड़ा या छोटा, ऊंचा या नीचा नहीं होता, बस समर्पण और भावना पवित्र होनी चाहिए। कथा प्रसंग की चर्चा में कहा की मांगने से कभी किसी को कुछ नहीं मिलता सुदामा निर्धन अवश्य थे परंतु दरिद्री नहीं थे वह ब्रह्मज्ञानी थे स्वाभिमानी ...
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