मेरठ, मार्च 12 -- कैलाश पर्वत रचना के मुख्य जिनालय में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 33वें दिन नित्य नियम पूजन व मांगलिक क्रियाएं की गई। 801 परिवारों भाग लेकर पुण्य अर्जन किया। विधान के मध्य भाव भूषण मुनिराज ने कहा कि मनुष्य भविष्य को लेकर संशय में रहता है और उसे सहारे की आवश्यकता होती है। सहारा लेना गलत नहीं है, सहारे के भरोसे रहना गलत है। योग्यता अपने भीतर से प्रकट होनी चाहिए। अगर स्वयं की क्षमता उत्पन्न हो गई तो फिर चिन्ता की बात न होगी। भगवान आदिनाथ का अभिषेक सुशील जैन, राकेश जैन व शांतिधारा विनोद जैन, सूरजमल, किशोर, प्रतीक जैन ने की। दीप प्रज्वलन का दीप राज रानी, रेखा जैन द्वारा प्रज्वलित किया गया। सांयकाल में भगवान आदिनाथ की आरती गुरुकुल के छात्रों द्वारा किया गया। कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष जीवेद्र जैन, महामंत्री मु...