प्रयागराज, मार्च 10 -- इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं में प्राप्त अंक गोपनीय नहीं माने जा सकते इसलिए यदि परीक्षा में शामिल कोई अभ्यर्थी सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत दूसरे अभ्यर्थियों के अंक की जानकारी मांगता है तो इसके लिए तीसरे पक्ष की सहमति आवश्यक नहीं है। याची के अधिवक्ता कृष्णजी शुक्ल व अन्य पक्षकारों के वकीलों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति अजित कुमार एवं न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने कहा कि सार्वजनिक परीक्षा में प्राप्त अंक निजी या गोपनीय की श्रेणी में नहीं आते। कोर्ट ने कहा कि किसी अभ्यर्थी ने परीक्षा में भाग लिया हो और वह दूसरे अभ्यर्थी के प्राप्तांक की जानकारी मांगता है तो इसे ऐसी गोपनीय या निजी सूचना नहीं माना जा सकता जिसके लिए तीसरे पक्ष की सहमति आवश्यक हो। मामला रेलवे...