प्रयागराज, जनवरी 31 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि भरण पोषण की बकाया राशि वसूलने के लिए सीधे गिरफ्तारी वारंट जारी करना न केवल कानून के विशिष्ट प्रावधानों के विरुद्ध है, बल्कि यह किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा का भी उल्लंघन है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ल ने अलीगढ़ के मोहम्मद शहजाद की याचिका पर दिया है। साथ ही यह टिप्पणी के साथ गुजारा भत्ता मामले में जारी गिरफ्तारी वारंट रद्द कर दिया। अलीगढ़ की फैमिली कोर्ट ने गुजारा भत्ता बकाया मामले में याची के खिलाफ वसूली और गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के बाद कहा कि फैमिली कोर्ट अक्सर भरण पोषण के मामलों में कानूनी प्रक्रिया अपनाए बगैर सीधे गैर जमानती वारंट या गिरफ्तारी वारंट जारी कर रही हैं, जिसे तत्काल रोकने की आवश्यकता है। हाईकोर...