प्रयागराज, जुलाई 24 -- Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि भरण-पोषण (मेंटेनेंस) का आदेश एक निरंतर दायित्व है। इसलिए पत्नी को हर महीने या हर बार बकाया राशि की वसूली के लिए नया निष्पादन आवेदन दाखिल करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि फैमिली कोर्टों द्वारा ऐसा करना सुप्रीम कोर्ट के स्थापित कानून के विपरीत है। न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि ने जौनपुर निवासी माला कुमारी की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए फैमिली कोर्ट, जौनपुर के 6 दिसंबर 2025 और 27 जनवरी 2026 के आदेशों को गलत ठहराया।क्या था मामला माला कुमारी ने वर्ष 2018 में धारा 125 सीआरपीसी के तहत पति आनंद कुंवर से भरण-पोषण की मांग की थी। फैमिली कोर्ट ने 4 मार्च 2023 को पति को आवेदन की तारीख 11 मई 2018 से 5,000 रुपये प्...