अयोध्या, मार्च 27 -- नौणी तिथि मधुमास पुनीता.. के पावन पर शुक्रवार को भये प्रकट कृपाला दीन दयाला, कौशल्या हितकारी.. की स्तुति के साथ रामलला का प्राकट्य हो गया। मध्याह्न ठीक 12 बजे घड़ी की टिक-टिक करती सुईयां जैसी ही करबद्ध हुई घंटा -घड़ियाल के साथ शंखध्वनि गुंजायमान हो गयी। इसी पल भगवान सूर्य नारायण भी अपने रश्मि रथों के साथ उपस्थित हुए और उन्होंने अपने वंशज के अवतरण की बेला में उनके ललाट पर अपनी रश्मियों से तिलक शुभाशीष प्रदान किया। इस अलौकिक क्षण के साक्षी बने लाखों श्रद्धालुओं ने जयघोष के साथ अखिल कोटि ब्रह्माण्ड नायक का अभिनंदन किया। रामनवमी के। पर्व पर यह दृश्य राम मंदिर का था। श्रीराम चरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास ने रामलला के प्राकट्य का वर्णन करते हुए तत्कालीन मौसम की जो परिकल्पना प्रस्तुत की। वह इस अधिकार भी यथार्थ होती दिख रही...