ललितपुर, मार्च 31 -- ललितपुर। पाकिस्तान के सिंध प्रांत में जन्में बाबा सदन के बचपन का नाम जलालुद्दीन कुरैशी था। अपने गुरू आखुंद सिंधी से इल्म की तालीम प्राप्त करने वाला यह सूफी संत बचपन से ही सभी धर्मों के प्रति आदर भाव रखता थे। युवावस्था में एक बार वह दिल्ली स्थित हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर आए और यहीं पर उन्हें सूफी मत के प्रचार का निर्देश मिला और उन्होंने अपना पूरा जीवन इसी में समर्पित कर दिया। वह तत्कालीन चंदेरी रियासत के अंग रहे ललितपुर में आकर बस गए। बाबा सदन भगवान जगन्नाथ के अनन्य भक्त थे। सालिगराम की बटिया वह हमेशा अपने पास रखते थे। उसे बांट के रूप में अपने मांस के कारोबार में इस्तेमाल करते थे। चाहे जितने का मांस खरीदा जाए, वह अपनी एक बटिया से ही तौल देते थे। यह एक साधु को नागवार गुजरा। चुपचाप उस बटिया को चुरा लाया। बाबा बट...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.