नई दिल्ली, अप्रैल 7 -- एक दिन पार्वती ने महादेव से पूछा, 'आपको नंदी इतना प्रिय क्यों है?' महादेव ने कहा, 'नंदी में सेवा और भक्ति दोनों का समन्वय है। उसके सेवा-कर्म में शौर्य है। उसकी भक्ति में तप है, समर्पण है, निरंतर सुमिरन है, इसलिए नंदी मुझे प्राणवत प्रिय है।' पार्वती ने शिव से फिर पूछा, 'प्रभु! भक्ति-भाव और समर्पण तो आपके सभी भक्तों और गणों में है। फिर नंदी की भक्ति में ऐसा क्या विशेष है?'नंदी ने क्या वर मांगा महादेव ने पार्वती को उत्तर देते हुए कहा, 'नंदी को अपने पिता ऋषि शिलाद से यह पता चला कि वह अल्पायु है। यह विचार कर नंदी भुवन नदी के किनारे साधना करने लगा। उसके सुमिरन में अटूट लगन और एकचित्तता थी। जब एक कोटि सुमिरन पूर्ण हुए, तो मैं प्रकट होकर दर्शन देने को विवश हो गया। जानती हो, वह साधना-सुमिरन में इतना मग्न था कि मुझसे वर मांगन...