वाराणसी, दिसम्बर 12 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। व्यक्ति के अंदर इच्छाएं होती हैं जो तितिक्षा बन जीवनभर किसी की प्रतीक्षा करती रहती हैं। कोई तितिक्षा कभी होती कभी नहीं, ऐसे में शंका का उदय होता है जिसे स्वाध्यायग्राही ही रहस्यमयी युक्ति से पूरा कर पाता है। शास्त्र कहता हैं कि शंकर ही शंका मिटाते हैं इसलिए उसे शंकर कहा गया है। ये बातें स्वामी भगवान वेदांताचार्य ने कहीं। वह फलाहारी बाबा आश्रम की ओर से शिवपुर रामलीला मैदान में हो रहे महालक्ष्मी महायज्ञ के निमित्त आयोजित शिवमहापुराण कथा के सातवें दिन गुरुवार को प्रवचन कर रहे थे। शिव पार्वती विवाह का अनुष्ठान पूर्ण कराने के बाद कथा को विस्तार देते हुए उन्होंने कहा कि शंकर का एक अर्थ विद्या का देव भी है। आनंद, कल्याण, परम मंगल, कैलाश को देखकर जो आंतरिक आनंद की अनुभूति होती है वह शिवतत्व की हलकी...