मुरादाबाद, फरवरी 16 -- लक्ष्मी नगर पीतल बस्ती में हिंदू संस्कार केंद्र स्थित प्राचीन शिव मंदिर में चल रही शिव महापुराण कथा में कथा व्यास महेंद्र शास्त्री ने कहा कि भगवान शंकर को जल की धार अति प्रिय है। भगवान शिव को रुद्रा इस लिए भी कहा जाता है कि यह रुत अर्थात दुखों का नाश कर देते हैं। उन्होंने बताया कि शिव की भक्ति सभी प्रकार के दुख, ग्रहों की पीड़ा एवं कुंडली में काल सर्प दोष को भी शांत कर देती है। रुद्राभिषेक का तो वर्णन ही अनंत है। उन्होंने बताया कि इस जगत में राम से बड़ा दृष्टा कोई नहीं है। उन्होंने लंका जाने से पूर्व राक्षसों के विध्वंस के लिए स्वयं रामेश्वरम की स्थापना की और रुदाभिषेक किया। व्यवस्था में श्याम कृष्ण रस्तोगी, हर स्वरूप, चंद्रभान सैनी, विनोद शर्मा, शिव कुमार, रविंद्र, डा. संजीव,जगदीश, गणेश, मनोज, चंद्रपाल आदि रहे।

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