बरेली, जुलाई 25 -- बहेड़ी। पंडित मधुर गोपाल दास शास्त्री ने भगवान राम के जन्मोत्सव का सचित्र वर्णन किया। जिसको सुनकर लोग भावुक हो गए। यहां रूपपुर गांव में एक मैरिज हाल में रामकथा सुनाते हुए भगवान राम के जन्मोत्सव का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि वहां गोमती तट पर निवास किया। वहां के ऋषियों के बताए हुए अब तीर्थों की यात्रा की और उसके बाद ऋषि जीवन अपनाया।

तपस्या की कठिनाई वल्कल वस्त्र धारण किए कंदमूल फल का सेवन किया और इरद शाक्षर मंत्र का जप करते करते सच्चिदानंद ब्रह्म का स्मरण चिंतन करने लगे। धीरे धीरे भक्ति बढ़ती गई फिर तो भगवान के दर्शन करने के लिए अति कठिन तपस्या का आचरण किया। कंद मूल फल का भी त्याग कर दिया। मात्र जलपान करके भक्ति करने लगे। इस तरह छह वर्ष बीतने के बाद उन्होंने जल का भी त्याग कर दिया। जीव जब परमात्मा के लिए लौकिक सुखों ...