मथुरा, जून 27 -- हमारे ब्रजचंद्र गोकुलनाथ हों या मथुराधीश अथवा द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण हैं। वे दीनवत्सल कृपामूर्ति हैं। वे कभी यमलार्जुन पर कृपावृष्टि करते हैं तो कभी कुब्जा पर कृपालु होते हैं और कभी वे सुदामा के सखा बनकर उन्हें त्रिलोकी की संपदा प्रदान कर देते हैं। यह विचार रमणरेती स्थित श्री राधा सर्वेश्वर युगल बिहारी के नवनिर्मित मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत जगद्गुरु निम्बार्काचार्य स्वभूराम द्वाराचार्य राधामोहन शरण महाराज ने व्यासपीठ से व्यक्त किए। उन्होंने विविध मार्मिक और गूढ़ प्रसंगों के माध्यम से पाण्डवों पर श्रीकृष्ण के अनुग्रह और उद्धव को दिए गए तत्वज्ञान के उपदेष की कथा सुनाई कि किस प्रकार जीव को निरंतर भगवान की सन्निधि का अनुभव करते हुए उनकी कृपा माधुरी का अनुभव करना चाहिए। यह भी पढ़ें- अखंड हरिनाम संकीर्तन के साथ...