वाराणसी, जनवरी 25 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। भगवान की समस्त लीलाएं जीव को शिक्षा देती हैं। चीरहरण लीला का रहस्य यही है कि अनंत काल से जीव का अंतिम समय में चीरहरण होता है। भगवान सच्चिदानंद हैं। उनकी रासलीला सांसारिक कामलीला नहीं है। इसका नाम कामविजय लीला है। ये विचार भागवत प्रवक्ता आचार्य तुंगनाथ त्रिपाठी के हैं। वह करौंदी स्थित महामनानगर कॉलोनी में हो रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञानयज्ञ के छठे दिन रविवार को प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि रासलीला जीवात्मा के परमात्मा से दिव्य मिलन की लीला है। गोपियों ने भगवान के लिए सर्व का त्याग किया तो कृष्ण उनके पीछे पीछे चलते हैं। वह सर्वव्यापक और सर्वस्वतंत्र होने पर भी उनके वश में रहते हैं। यही भक्ति का सर्वोच्च फल है। प्रेम की पराकाष्ठा एवं गृहस्थ जीवन की मर्यादा के लिए ही भगवान श्...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.