मेरठ, मार्च 10 -- जिनेंद्र भगवान की भक्ति ही हमें स्वर्ग व मोक्ष की सिद्धि कराती हैं, यदि हम दुनिया का मोह, लालच और दूसरे के प्रति हीन भावना न रखकर अपना ध्यान भगवान शांतिनाथ की आराधना करने में लगाएं तो इससे दुखों का निवारण होता है और हमारी अंतर आत्मा को शांति मिलती हैं। उक्त प्रवचन मुनि भाव भूषण महाराज ने विधान के मध्य कहें। विश्व की सुख, शांति एवं समृद्धि के लिए चल रहे भक्तामर विधान के 31वें दिन प्रतिदिन की भांति नित्य नियम पूजन किया गया। विधान में सर्वप्रथम भगवान की शांतिधारा प्रदीप जैन, अंकुर जैन व अभिषेक नरेश चंद जैन ने किया। 95 परिवारों द्वारा सामूहिक विधान किया गया। जिसमें दूर दराज से आए श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म लाभ अर्जित किया। सायंकाल में भगवान आदिनाथ की आरती की गई। दीप प्रज्वलन माधुरी जैन द्वारा किया गया। रात्रि में सांस्कृति...