मोतिहारी, जून 11 -- मोतिहारी। भगवान भाव के भूखे और भक्तों के वश में होते हैं। जिस समय भक्त अपने आराध्य देव भगवान को याद करता है;वे भी किसी न किसी रूप में अवश्य उपस्थित हो जाते हैं और संकट में पड़े भक्तों की सहायता करते हैं।ये बातें अपने दूसरे दिन के प्रवचन में वृंदावन से पधारीं राजनंदिनी किशोरी ने उपस्थित श्रद्धालुओं से कही। यह भी पढ़ें- भक्तों के वश में होते हैं भगवान: राजनंदिनीभगवान श्रीकृष्ण की लीलाएँ उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं की चर्चा करते हुए कहा कि महाभारत युद्ध के पहले जब कृष्ण शांतिदूत बनकर धृतराष्ट्र के दरबार में गये थे। उन्होंने दुर्योधन का छप्पन व्यंजन छोड़कर विदुर के घर रुखा-सूखा भोजन करना स्वीकार किया था। आगे भगवान विष्णु के नाभि कमल से उत्पन्न ब्रह्मा जी के द्वारा सृष्टि के रचना किये जाने के प्रसंग की विस्तृत चर्चा की...