मुजफ्फर नगर, मई 27 -- मुजफ्फरनगर। शुकतीर्थ स्थित श्री शुकदेव आश्रम में जिला जज वीरेंद्र सिंह द्वारा आयोजित श्री मद् भागवत महापुराण के चौथे दिन कथा व्यास सुमन कृष्ण शास्त्री ने कहा कि जब भक्त फल की चिंता छोड़कर केवल प्रभु के चरणों में लीन हो जाता है, तो ईश्वर सहज रूप से उससे प्रसन्न होते हैं और अपने भक्त की रक्षा करते हैं। श्रीमद् भागवत महापुराण को भगवान की शब्दमयी मूर्ति और श्री कृष्ण का स्वरूप माना गया है ।भागवत कथा श्रवण से सकारात्मक बदलाव आते हैं और ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है । जब कोई भक्त सांसारिक मोह माया और स्वार्थ को त्याग कर शुद्ध प्रेम से प्रभु को पुकारता है तो ईश्वर सहज ही उसके हृदय में निवास करते हैं। भक्ति हमेशा निस्वार्थ होनी चाहिए और जीवन में जो भी मिले उसे ईश्वर का प्रसाद मानना चाहिए। भक्ति का अर्थ है पूर्ण समर्पण ,प्रेम ...