भागलपुर, जून 2 -- कहलगांव, निज प्रतिनिधि। कहलगांव शहर के पटेल नगर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन कथा वाचक स्वामी रामानंद शास्त्री महाराज ने कहा कि केवल कृपा की कामना से की जाने वाली भक्ति पूर्ण नहीं होती। भक्ति के मार्ग पर चलने के लिए निष्कपटता, दीनता, सरलता और समर्पण भाव आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि सुदामा जी के जीवन में ये सभी गुण विद्यमान थे, इसलिए उनकी भक्ति आदर्श मानी जाती है। कथावाचक ने कहा कि सुदामा जी निर्धन अवश्य थे, लेकिन भिखारी नहीं, क्योंकि उनके पास संतोष रूपी अमूल्य धन था। उन्होंने संतोष को जीवन का सबसे बड़ा वैभव बताते हुए कहा कि असंतुष्ट व्यक्ति ही वास्तविक दरिद्र होता है। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा का मिलन भक्त और भगवान के प्रेम का अनुपम उदाहरण है। प्रवचन के दौरान नारद जी द्वारा वसुदेव को गुरु धारण करने की प्रेरणा, ...