मेरठ, अप्रैल 23 -- श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के दूसरे दिन भक्तों ने प्रातः जाप्य अनुष्ठान किया। तदोपरान्त श्री शांतिनाथ भगवान का अभिषेक किया। शांतिधारा वीरेंद्र जैन, अरुण जैन द्वारा की गई। समस्त श्रद्धालुओं ने शांतिधारा के मंत्रो को शांति के साथ श्रवण किया। मुनि भाव भूषण महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि हर एक श्रद्धालु को सिद्धचक्र महामंडल विधान करना चाहिए। क्योंकि अंतिम लक्ष्य के रूप में संसारी प्राणी मोक्ष नहीं पा सकता है। इसलिए सिद्धों की आराधना के बिना मोक्ष का लक्ष्य सिद्ध नहीं हो सकता। बताया कि भक्ति का फल सांसारिक विषयों में ना लगाएं, न ही उनकी अपेक्षा रखें। क्योंकि यह विधान तो वह विधान है जिसके माध्यम से अनंत कालीन सुख की प्राप्ति हो सकती है। अगर मांग रखना है तो आत्मिक सुख संपत्...