भक्ति और सद्कर्म से ही मानव जीवन सार्थक
कानपुर, जून 14 -- कानपुर। श्रीमद्भागवत कथा, कोयलानगर में कथा व्यास पंडित डॉ. काशीनाथ मिश्र ने मानव धर्म, कर्म के महत्व और कलियुग के वर्तमान स्वरूप एवं भविष्य से जुड़े विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है, जो अनेक जन्मों के पुण्य और तपस्या के बाद प्राप्त होता है, इसलिए इसे केवल सांसारिक मोह में व्यर्थ नहीं करना चाहिए। उन्होंने उन्होंने त्रिकाल संध्या, भगवान विष्णु के नामों का स्मरण, पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म और तीर्थ यात्रा जैसे धार्मिक कर्तव्यों के महत्व को समझाते हुए कहा कि ईश्वर भक्ति और सद्कर्म ही मानव जीवन को सार्थक बनाते हैं। राधे तेरे चरणों की, मेरे झोपड़ी के भाग खुल जाएंगे, राम आएंगे और श्रीमन नारायण नारायण हरि हरि जैसे भजन गाए।
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