कानपुर, मार्च 29 -- कानपुर। सीएसजेएम विश्वविद्यालय स्थित वीरांगना लक्ष्मीबाई सभागार में आयोजित हनुमान कथा के आठवें दिन विजय कौशल महाराज प्रभु महिमा का मनोरम वर्णन किया। उन्होंने प्रभु श्रीराम के विवाह प्रसंगों का वर्णन किया। मुख्य यजमान उद्योगपति गुलशन धूपद और संजय नेवतिया रहे। आचार्य ने प्रभु श्री राम के स्वयंवर की जीवंत व्यख्या करते हुए कहा कि स्वयंवर में मौजूद लोगों ने प्रभु श्रीराम को अलग-अलग रूप में देखा। कहा धनुष जब अहंकार का प्रतीक हो तब इसे चढ़ाया नहीं तोड़ा जाता है। भक्ति, साधना और भजन धीर-धीरे करें और बढाएं। बताया कि किसी भी अवतार का विधिवत विवाह नहीं हुआ, सिर्फ प्रभु श्री राम का हुआ। मां जानकी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि वह भक्ति की प्रतीक हैं। ब्रह्म के दर्शन भक्ति के प्रकाश में ही संभव है। भजन नियमित रूप से करना चाहिए। ...