एटा, अप्रैल 4 -- जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के गर्भकल्याणक पर मंदिरों में प्रभु का अभिषेक, पूजन किया गया। शाम 7 बजे से पुरानी बस्ती स्थित बड़े जैन मंदिर में भक्तामर दीप अर्चना की गई। जैन महिला संगठन अध्यक्षा बबिता जैन प्रेरणा ने बताया की जैन धर्म में भक्तामर स्तोत्र 48 छंदों का दिव्य पुंज है। जब आचार्य मानतुंग स्वामी को उज्जैन के राजा ने उनके आदेश की अवमानना करने पर कारागृह में अड़तालीस ताले लगाकर बंदी बनाया था। तब आचार्य मानतुंग स्वामी के अंतरंग से यह स्तोत्र प्रस्फुटित हुआ। उन्होंने प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की पूर्ण श्रद्धा से स्तुति की। भक्ति की शक्ति से ताले स्वत: ही टूट गये। राजा ने आकर क्षमा याचना की। मंगल आरती के पश्चात जन्मकल्याणक महिला मंडल ने चौबीस तीर्थंकरों की जन्म कल्याणक तिथियों पर नेमिनाथ जिनालय में प्रा...