नई दिल्ली, मार्च 4 -- मानस में भक्त के चार प्रकार बताए गए हैं- ज्ञानी, जिज्ञासु, अर्थार्थी एवं आर्त। चार प्रकार के भक्तों की बात कह देना बहुत सरल है। भक्ति में वास्तविकता-अवास्तविकता का प्रश्न पहले नहीं उठाया जाता। जब तैरना सीख जाएंगे, तभी नदी में उतरेंगे, ऐसा नहीं कहा जा सकता।इसका तो श्रीगणेश ही व्यक्ति की अपनी मान्यता से होता है। संसार सत्य है या असत्य? विषय को चाहना उचित है या अनुचित? प्रारंभिक स्थिति में इन विवादों की कोई आवश्यकता नहीं। यहां तो सीधा आमंत्रण है।गवान का सुख पाना, उसमें एक हो जाना तुम संकट से त्राण पाना चाहते हो! ये सब प्रभु से ही संभव है। ब्रह्म-सुख पाना चाहते हो, तो आओ, प्रारंभ कर दो प्रभु के चरणों में भक्ति। अर्थ और अभिलाषाओं की पूर्ति चाहते हो! रहस्य जानना चाहते हो! सब सर्वदा प्रभु द्वारा साध्य होगा।भय और लोभ की सहज ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.