नई दिल्ली, मार्च 13 -- केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसजेंडर्स, समलैंगिक पुरुषों (MSM) और महिला सेक्स वर्कर्स को संभावित रक्तदाताओं (Blood Donors) की सूची से बाहर रखने के अपने फैसले का बचाव किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं है, बल्कि यह उन स्वास्थ्य अध्ययनों पर आधारित है जिनमें पाया गया है कि इन समूहों में एचआईवी (HIV) संक्रमण का खतरा आम लोगों की तुलना में 6 से 13 गुना अधिक है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि 'राष्ट्रीय रक्त नीति' का मुख्य उद्देश्य हमेशा सबसे सुरक्षित डोनर पूल से रक्त प्राप्त करना होता है।नीति के खिलाफ है उच्च जोखिम वाले समूहों से ब्लड लेना एएसज...