नई दिल्ली, सितम्बर 2 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता नेपाल की हालिया त्रासदी ने हिमालयी राज्यों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि हजारों टन बर्फ की चट्टानें कुछ ही मिनटों में टूटकर गिर जाएं या ग्लेशियर झील फट जाए तो ऐसी स्थिति में चेतावनी प्रणाली से कितनी जानें बचाई जा सकती हैं ? विशेषज्ञों का मानना है कि केवल चेतावनी प्रणाली पर निर्भर रहने की बजाय हिमालय क्षेत्र में भूमि उपयोग पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। यह भी पढ़ें- जलवायु परिवर्तन से गर्म हो रहा हिमालय, बाढ़ का खतरा बढ़ाआपदा का कारण डरार से शुरू होने वाली खतरनाक घटना यह भी पढ़ें- मदद नहीं, चाहिए मुआवजा: नेपाल ने अब बड़ी की लड़ाई; UN में PM बालेन शाह उठाएंगे मुद्दा, भारत पर क्या प्लानिंग? इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (आईसीआईमोड) के वैज...