नई दिल्ली, फरवरी 26 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अदालतों में मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए बनाए गए न्यायाधिकरणों (ट्रिब्यूनल्स) के काम करने के तौर तरीके पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वे बिना किसी 'जवाबदेही' के 'बोझ' बन गए हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि स्थिति इतनी खराब हो गई है कि वित्तीय मामलों की देखरेख के लिए गठित न्यायाधिकरण के तकनीकी सदस्य फैसले लिखने का काम भी आउटसोर्स के जरिए कर रहे हैं। याचिका पर सुनवाई के दौरान टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि ट्रिब्यूनल सरकार की बनाई हुई निकाय है। यह निकाय बिना किसी जवाबदेही के 'नो-मैन्स लैंड' की तरह काम कर रही है। पीठ ने पिछले साल पारित अपने फैसले, जिसमें ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट, 2021 को रद्द...