इटावा औरैया, मार्च 30 -- ग्राम जैनपुर नागर में आयोजित बौद्ध भीम गाथा कार्यक्रम में उस समय भावुक माहौल बन गया, जब कथा वाचिका प्रेमा अम्बेडकर ने भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर के पिता रामजी मालोजी सकपाल के संघर्षपूर्ण जीवन का मार्मिक वर्णन किया। उनके विचारों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गहराई से प्रभावित किया। प्रेमा अम्बेडकर ने बताया कि रामजी सकपाल ब्रिटिश भारतीय सेना में सूबेदार पद पर कार्यरत थे और उनका जीवन अनुशासन, शिक्षा व उच्च संस्कारों से परिपूर्ण था। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और अपने बच्चों को शिक्षित बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए।कथा के दौरान उन्होंने कहा कि उस समय समाज में गहरा भेदभाव व्याप्त था, लेकिन रामजी सकपाल ने अपने पुत्र भीमराव को यह अमूल्य सीख दी कि "ज्ञान ही सबसे बड़ी शक्ति है।"...