बांका, जनवरी 20 -- बौंसी, निज संवाददाता। समय के साथ परंपराएँ बदलती हैं, व्यवस्थाएँ बदलती हैं, लेकिन स्मृतियों की सुगंध कभी फीकी नहीं पड़ती। पूर्वी बिहार के सबसे बड़े और ऐतिहासिक लोक उत्सव के रूप में पहचाना जाने वाला बौंसी मेला इसका जीवंत उदाहरण है। यह मेला केवल खरीद-बिक्री का केंद्र नहीं, बल्कि पीढ़ियों की यादों, आस्थाओं और सपनों का संगम रहा है। कभी लगभग एक महीने तक चलने वाला यह मेला आज महज एक सप्ताह में सिमट कर रह गया है। यह सिमटना सिर्फ दिनों का नहीं है, बल्कि उन संभावनाओं, अवसरों और उम्मीदों का भी है, जिनसे हजारों लोगों की आजीविका और क्षेत्र की पहचान जुड़ी हुई है। बौंसी मेला वह मंच है, जहाँ हर साल दूर-दराज से आए व्यापारी पूरे साल की तैयारी के साथ पहुँचते हैं। किसी के लिए यह मेला सालभर की कमाई का आधार होता है, तो किसी के लिए जीवन की बड़...
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