बहराइच, फरवरी 25 -- जिलों की सड़कों पर रोजाना लाखों लोग ऑटो, टेम्पो और ई-रिक्शा के भरोसे सफर करते हैं। बसों की सीमित उपलब्धता और हर मोहल्ले तक सार्वजनिक परिवहन न पहुंच पाने के कारण ये वाहन आमजन की लाइफलाइन बन चुके हैं। लेकिन शहर में लगातार बढ़ती संख्या के साथ इनकी स्थिति, नियमों के पालन और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल भी उतनी ही तेजी से उठ रहे हैं। बीते कुछ सालों से ऑटो और ई-रिक्शा ने छोटी दूरी की यात्रा को आसान और सुलभ बनाया है। दफ्तर, स्कूल, बाजार और अस्पताल तक पहुंचने में लोगों को इनसे काफी राहत मिलती है। खासकर महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह इस समय सबसे सुविधाजनक विकल्प है। हालांकि, भीड़भाड़ के समय ओवरलोडिंग आम है। क्षमता से अधिक सवारी बैठाना यात्रियों की सुरक्षा के लिए खतरा बनता है। हालांकि जिम्मेदार विभाग की ओर से शहर में ऑटो और...