भागलपुर, जनवरी 29 -- -प्रस्तुति: श्रुतिकांत लग्न का मौसम भारतीय समाज में केवल शादी-ब्याह का समय नहीं होता, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र भी माना जाता है। जैसे ही शुभ मुहूर्त प्रारंभ होता है, गांव से लेकर शहर तक एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। बाजारों में भीड़ बढ़ जाती है, छोटे-बड़े व्यवसायों में रफ्तार आ जाती है और सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी इसी मौसम से जुड़ जाती है। इन्हीं व्यवसायों में एक महत्वपूर्ण नाम रहा है शामियाना का। कभी किसी भी शादी, तिलक, बरात, भोज या सामाजिक आयोजन की कल्पना शामियाने के बिना अधूरी मानी जाती थी। बांस, पाइप, कपड़े, झालर और लाइट से सजे शामियाने केवल छत नहीं होते थे, बल्कि वे उत्सव का केंद्र हुआ करते थे। लेकिन बीते एक दशक में विवाह आयोजनों की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। अब लोग ख...