भागलपुर, जनवरी 8 -- -प्रस्तुति: विजय झा ग्रामीण भारत की रीढ़ कही जाने वाली कृषि व्यवस्था आज कई तरह की चुनौतियों से जूझ रही है। इनमें सबसे गंभीर समस्या कृषि मजदूरों की लगातार हो रही कमी है। कभी जिन खेतों में हर मौसम में मजदूरों की चहल-पहल रहती थी, आज वही खेत मजदूरों के इंतजार में सूने पड़े रहते हैं। समय पर फसल की रोपनी, निराई, कटाई और मड़ाई नहीं हो पाने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। वर्तमान समय में गेहूं की खेती में मशीनों का प्रयोग अपेक्षाकृत बढ़ा है। गेहूं की फसल खड़ी रहने के कारण हार्वेस्टर से कटाई संभव हो जाती है, जिससे मजदूरों पर निर्भरता कुछ हद तक कम हुई है। लेकिन धान की खेती आज भी पूरी तरह मजदूर आधारित है। धान की बिचड़ा की रोपनी, निराई-गुड़ाई और तैयार फसल की कटनी अधिकतर हाथों से ही की जाती है। मशीनें यहां सीमित भूमिका ...
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