भागलपुर, फरवरी 3 -- -प्रस्तुति: श्रुतिकांत मिथिला क्षेत्र अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए देशभर में जाना जाता है। यहां विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं बल्कि दो परिवारों और दो सामाजिक परंपराओं का मिलन माना जाता रहा है। इसी सामाजिक सोच से जन्मी थी खानपीन की परंपरा, जिसे विवाह से पूर्व एक अनिवार्य सामाजिक पड़ाव के रूप में देखा जाता था। खानपीन का अर्थ केवल भोजन करना नहीं था। इसका उद्देश्य था वर पक्ष के घर जाकर वहां के रहन-सहन, पारिवारिक अनुशासन, महिलाओं के व्यवहार, बुजुर्गों की सोच, खानपान की शैली और घर के वातावरण को समझना। वधू पक्ष यह देखता था कि उनकी बेटी उस परिवेश में खुद को सुरक्षित, सम्मानित और सहज महसूस कर पाएगी या नहीं। इस परंपरा में वधू पक्ष के लोग चाहे वह पिता हों, चाचा हों, मामा हों या परिवार के अन्य सदस्य वर पक्ष के घर जाते थ...
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