मथुरा, जनवरी 23 -- बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान का असर अब जनपद में नजर आने लगा है। शहरी क्षेत्र में शिक्षित बेटियों संख्या तेजी से बढ़ रही है। परंतु, ग्रामीण अंचल अभी भी बेटियों की साक्षरता दर में शहर के मुकाबले पीछे हैं। बेटियों के साथ भेदभाव के मामले भी ग्रामीण क्षेत्रों से सामने आते रहते हैं। भ्रूण हत्या रोकने को कानून बना है, लेकिन आज भी चोरी-छिपे भ्रूण हत्या के केस भी चर्चा में रहते हैं। बेटियों को लेकर समाज की सोच बदल कर ही इसे रोका जा सकता है। ऐसे में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नारे की सार्थकता सिर्फ शहरों तक सिमटती नजर आ रही है, जबकि ग्रामीण अंचल में लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। आज ब्रज की बेटियां बेटों से कम नहीं हैं। समय बदल रहा है और बदलते समय के साथ लोगों की सोच भी बदली है। बालिकाएं अब बोझ नहीं, बल्कि वह परिवार का मजबूत आधार ब...