मथुरा, दिसम्बर 29 -- कभी सुनते थे कि खेलोगे-कूदोगे तो बनोगे खराब, पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोने नवाब। एक पीढ़ी यही सुनते, करते बड़ी हुई। लेकिन आज के युवाओं के लिए ये कहावत पूरी तरह बदल गई है। जिसने मन लगाकर खेला, वो अब किसी नवाब से कम नहीं है। सरकार की विभिन्न योजनाओं और खेलने के प्रति खुलेपन के चलते विभिन्न खेलों में प्रतिभाएं सामने आ रही हैं। शूटिंग, कुश्ती, क्रिकेट, स्क्वैश, शतरंज, फुटबॉल, हॉकी आदि तमाम खेलों में भारत ने हाल के वर्षों में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। पैरालंपिक में भी भारत ने स्वर्णिम इतिहास लिखा है। अंतर्रा्ष्ट्रीय स्तर पर भारत का लगातार सुधरता प्रदर्शन युवाओं को उसकी तरफ आकर्षित कर रहा है। जिले में खेलों की स्थिति में अब पहले की तुलना में बड़ा एवं सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। एक समय जब यहां खेलों का दायरा केवल परंपर...