मथुरा, दिसम्बर 10 -- महिला अधिवक्ता अपने परिवार, समाज की समस्याओं से जुझते हुए जब कचहरी पहुंचती हैं तो उनको यहां भी समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। जो शादी शुदा अधिवक्ता हैं वह अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार करती हैं फिर अपने सास ससुर, अन्य परिजनों के लिए रसोई पकाती है। उसके बाद जब अपने कार्य स्थल पहुंचती हैं। महिला अधिवक्ताओं का कहना है कि उनके साथ महिला अधिवक्ता उनकी समस्याओं हल कराने के लिए आगे नहीं आ पाती हैं। जबकि ज्यादातर पुरुष अभिवक्ता उनकी मदद को तैयार रहते हैं। कुछ जूनियर महिला अधिक्ताओं का कहना है कि सभी महिला अधिवक्ता ऐसी भी नहीं हैं, जो उनको आगे बढ़ाने में पीछे रहें। बार ऐसोशिएशन में पुरुषों के बराबर मिलने चाहिए पद महिला अधिवक्ताओं का दर्द आज हिन्दुस्तान के बोले के दौरान झलक कर सामने आया। उनका कहना है कि जहां पंचायत, स्थानीय ...