बोकारो, मार्च 3 -- होली भारतीयों को प्रमुख त्योहार में से एक है। एक समय था जब लोग पलाश के फूल से होली खेलने के लिए रंग बनाया करते थे। जो कैमिकल रहित होता था। समय के साथ होली में खेले जाने वाले रंगों को दौर बदला। प्राकृतिक रंग से कैमिकलयुक्त रंग से बाजार भर गया। रंगों से लोगों को कई प्रकार की स्कीन संबंधी बीमारियां होने लगी। वहीं, शराब और अन्य नशाओं के कारण भी होली के रंग को कई बार बेरंग कर दिया जाता है। कई जगहों पर हुड़दंग हो जाता है। इन सब के बीच लोगों ने होली में अपने परिवार तक ही सिमट कर रहना बेहतर समझा। पुलिस प्रशासन शांति समिति की बैठक कराती रहती है, ताकि रंगों के त्योहार में किसी प्रकार का बदरंग नहीं चढ़े। इसके बाद भी होली फिकी होती जा रही है। अब फगुआ गाने वालों की जमात भी कम होती जा रही है। हिन्दुस्तान बोले बोकारो संवाद कार्यक्रम म...
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