बिहारशरीफ, अक्टूबर 9 -- बोले बिहारशरीफ - संवाद पलायन सूनी हो रहीं नालंदा की गलियां, रोजगार की तलाश में परदेसी बन रहे युवा लोगों ने कहा- गांव में काम नहीं, खेती में फायदा नहीं; पेट पालने की मजबूरी खींच ले जाती है महानगर बिहारशरीफ, हिन्दुस्तान टीम। नालंदा की ऐतिहासिक धरती पर आज एक खामोश हकीकत पसर रही है। इसके गांव खाली हो रहे हैं। जहाँ अब बच्चों की खिलखिलाहट से ज्यादा बुजुर्गों का इंतजार गूंजता है। खेती पर आधारित इस जिले में मौसम की मार, सीमित उद्योग और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों का घोर अभाव हर साल हजारों युवाओं को पलायन पर मजबूर कर रहा है। रोजी-रोटी की तलाश में ये युवा अपना घर-आंगन छोड़कर दिल्ली, मुंबई, पंजाब और गुजरात जैसे महानगरों का रुख करते हैं। 'हिन्दुस्तान के संवाद में लोगों ने एक स्वर में कहा कि बेहतर मजदूरी की चाह और पेट पालने...
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