बिजनौर, दिसम्बर 16 -- पश्चिमी उत्तर प्रदेश (वेस्ट यूपी) में हाईकोर्ट बेंच की मांग कोई नई नहीं है, बल्कि यह बीते आठ दशकों से अधिक समय से चल रहा ऐसा आंदोलन है, जो अब न्यायिक उपेक्षा और राजनीतिक उदासीनता का प्रतीक बन चुका है। 1948 में पहली बार यह मांग जोर-शोर से उठाई गई थी और तब से लेकर अब तक कई आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और हड़तालें हो चुकी हैं। बावजूद इसके, आज तक वेस्ट यूपी की आठ करोड़ जनता सुलभ न्यायिक सुविधा से वंचित है। अधिवक्ताओं, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों का कहना है कि वेस्ट यूपी में हाईकोर्ट बेंच का न होना न्याय को महंगा, कठिन और आमजन की पहुंच से बाहर बना रहा है। यही वजह है कि इस मांग को लेकर समय-समय पर बड़े आंदोलन, धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन और यहां तक कि सांसद के आवास का कई बार घेराव भी किया जा चुका है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बे...
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