बहराइच, नवम्बर 10 -- जिले की चिकित्सीय सेवाएं पिछले पांच सालों में बेहतर हुईं हैं लेकिन मेडिकल कॉलेज को छोड़ दें तो ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज के नाम पर कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ है। पीएचसी से 90 फीसद गंभीर मरीज दर्द का इंजेक्शन लगाने के बाद मेडिकल कॉलेज रेफर किए जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज का आपातकालीन कक्ष ऐसे मरीजों से 24 घंटे भरा रहता है। जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में डॉक्टरों का अभाव है। मरीजों के बैठने की व्यवस्था नहीं है। पीने के पानी का अभाव रहता है। सफाई कर्मचारी नहीं हैं। सभी प्रकार की दवाएं व पैथालॉजिकल जांचें नहीं हो पाती हैं। सिर्फ दो चार प्रकार की दवाएं व जांचें ही उपलब्ध हो पा रही हैं, जिससे मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं लेने में लंबी दौड़ लगानी पड़ रही है। वहीं जिम्मेदारों का कहना है कि सभी केन्द्रों पर दवाएं व जांच...