बहराइच, मार्च 13 -- आंतरिक सुरक्षा की पहली ईकाई चौकीदार जिन्हें अब ग्राम प्रहरी के रूप में पुकारा जाता है। काफी बदहाल पड़े है। दरअसल ब्रितानियां हुकुमत के दौरान से पुलिस महकमे के मददगार के रूप में चौकीदार ग्रामीण अंचल में सुरक्षा व्यवस्था की निगहबानी में मददगार तो बने ही रहे हैं। सामाजिक, आपराधिक गतिविधियों पर इनकी पैनी निगाह होती रही है। इनकी सूचना पर ही इलाका बीट प्रभारी हर असामाजिक कृत्य पर चौकस रहते है। चौकीदार का पद आज भी है। बस बदलाव यह कि कभी 300 माहवार पाने वाले यह सुरक्षा के सिपाही अब 2500 मासिक मानदेय पा रहे हैं। गांव की गतिविधियों पर तो इनकी निगाह रहती ही है। थानों पर भी इन्हे चार पांच तय दिनों पर काम लिया जाता है। सुरक्षा में मददगार होमगार्ड, पीआरडी के दिन तो कुछ अच्छे आए। मानदेय बढ़ा। चौकीदारों के मानदेय, वर्दी, सुरक्षा व्यवस...