बहराइच, जनवरी 5 -- सेवा, समर्पण व संवदेना यह तीनों एक नर्स की पहचान हैं। रोगियों की सेवा के साथ दोहरी जिम्मेदारी निभा रही हैं। दिन और रात रोगियों की देखभाल के साथ ही अपना परिवार संभाल रही हैं। सरकारी स्थाई पदों पर नियुक्तियां का दायरा काफी कम हो गया है। ऐसे में अब आउटसोर्स से ही नौकरी ही नर्सिंग की पढ़ाई करने वालों के पास एक मात्र विकल्प है। हर रोज खुद की जिंदगी के तमाम संघर्षों को झेलते हुए सभी बीमार मरीजों की सेवा में दृढ़ संकल्पित हैं। मौजूदा समय में सबसे ज्यादा समस्या संविदा व आउटसोर्सिंग से रखे कर्मचारियों की है। सभी का कहना है कि अल्प मानदेय में परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो गया है। इनका कहना है कि स्थाई नर्सों की भांति वह भी समान काम करते हैं मगर वेतन उन्हें इतना नहीं मिलता की परिवार का भरण पोषण ठीक से हो सके। सभी ने कहा कि उन...
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