बहराइच, दिसम्बर 31 -- भारत नेपाल सीमा पर बसे बहराइच की पहचान बरसोला मिठाई से होती थी। कुटीर उद्योग का यह उत्पाद चीनी से बनता था जो मुंह में जाते ही घुल जाता था, इसमे महिला कारीगरों की बड़ी भागेदारी थी। परिवार के पुरूषों के काम में हाथ बंटाती थीं। शहर आने वाले पर्यटक, रिश्तेदारी, व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े लोग शहर आने पर बरसोला और अनारकली झील किनारे के खुशबूदार पान ले जाना नहीं भूलते थे। बहराइच गोंद पतवार से बनी चटाई के लिए भी मशहूर था। मिट्टी से बने बर्तन की अलग पहचान थी। अब यह सब खो गया है। केन्द्र सरकार की ओडीओडी योजना में एक जिला, एक उत्पाद में गेंहू के डंठल से बनी कलाकृतियां अब देश ही नहीं विदेश में अलग पहचान बना रही हैं। थारू जनजाति के हस्तशिल्प का कुटीर उद्योग तो सरकारी प्रोत्साहन न मिलने से दम तोड़ने के कगार पर हैं। इन सब कुटीर...
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