बहराइच, दिसम्बर 4 -- वन्यजीवों के प्राकृतिक प्रवास से छेड़छाड़ के नतीजे अब सामने आने लगे है। जंगल में अंधाधुंध कटान से संरक्षित वन्यजीव बंदरों के झुंड गांव, कस्बे ही नहीं शहरों में भी दस्तक दे रहे हैं। उछल कूद से लुभाने वाले यह बंदर अब लोगों की जान को खतरा बन रहे हैं। हालात यह है कि यह लोगों को अक्सर काट भी लेते हैं। फसलों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। पयागपुर व बाबागंज इलाकों में तो कई मंदिर परिसरों में इन बंदरों के आतंक से श्रद्धालुओं को दिक्कत हो रही है। गाय की तरह ही बंदर भी एक बड़े समुदाय में श्रद्धा के केन्द्र है। बंदरों को चोट पहुंचाने पर आक्रोश की भी खबरे आती रहती है। बंदरों को पकड़ कर जंगल में छोड़ने का जिम्मा वन महकमे से इतर कर नगर पंचायतों, नगर पालिका परिषद, ब्लाक स्तर पर बीडीओ की निगरानी में होता रहता था। अब यह काम फिर वन महकमे क...
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