बहराइच, मार्च 11 -- बढ़ई, लोहार दोनों के हाथों के हुनर न केवल घर की दैनिक जरूरत वाले सामान तैयार होते हैं, बल्कि देश की सुरक्षा का ताना-बाना भी बुनते हैं। सरकार ने समय-समय पर उनके उत्थान को लेकर कई योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन अपात्रों की सेंधमारी से इनका हक भी मारा गया है। अच्छे दिन की तलाश में हर रोज ये लोग सरकारी महकमे की दहलीज पहुंचते हैं। लेकिन आश्वासनों की घुट्टी का प्रोत्साहन लेकर बैरंग लौट आते हैं। हालांकि पारंपरिक हुनर के बलबूते इस काम से लगे लोग जीविका चलाने को संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन युवा पीढ़ी इस क्षेत्र में तकनीक से जुड़कर तत्परता से जुड़कर काम करने पर जोर देते नजर आ रहे हैं। बोले बहराइच मुहिम के तहत हिन्दुस्तान ने इस समाज के लोगों से बातचीत को उन्होंने अपनी समस्या बेबाकी से रखी। बोले तकनीक के समन्वय से ही आर्थिकी हो सकेगी मजब...
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