गंगापार, जनवरी 2 -- किसानों का दर्द कड़ाके की ठंड, कोहरे से ढंके खेत, सन्नाटे को चीरती सर्द हवाएं और खुले आसमान के नीचे मचान पर बैठकर फसलों को बचाने की जद्दोजहद किसानों की नीयति बन चुकी है। यह कोई दृश्य मात्र नहीं, बल्कि आज के किसान की हकीकत है। जब शहरों में लोग रजाइयों और ब्लोअर की गर्मी से ठंड से बचने की कोशिश कर रहे हैं, तब गांवों में किसान अपनी फसलों की रखवाली करते हुए पूरी रात खेतों में जागने को मजबूर हैं। उनकी यह मजबूरी कोई नई नहीं है। छुट्टा जानवरों से फसलों को बचाने की उनकी शिकायतों को लगातार नजरअंदाज किया गया जिससे उनके सामने अपनी फसलों को खुद बचाने के सिवा कोई और रास्ता भी नहीं है। पूस की सर्द रात में किसान घोर गरीबी और व्यवस्था के बोझ तले अपने फसल की रखवाली के प्रति विवश होकर ठंड से ठिठुरता रहता है। अक्सर अपने पेट और शरीर को गर...
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