भागलपुर, मार्च 1 -- -प्रस्तुति : अमित कुमार रजनीश होली रंगों और उल्लास का ऐसा पर्व है, जो हर वर्ष फाल्गुन मास में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक मेलजोल, समरसता और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक है। इस पर्व का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान होलिका दहन है, जिसे असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक माना जाता है। किंतु आधुनिकता की तेज रफ्तार, बदलती जीवनशैली और शहरी व्यस्तताओं के बीच होलिका दहन की पारंपरिक चमक अब फीकी पड़ती दिखाई दे रही है। महानगरों और कस्बों में होलिका दहन अब एक औपचारिक कार्यक्रम बनकर रह गया है। पहले जहां मोहल्लों में लोग कई दिन पहले से लकड़ियां, उपले और अन्य सामग्री इकट्ठा करने में जुट जाते थे, वहीं अब तैयार लकड़ी खरीदकर औपचारिक रूप से दहन कर दिया जाता है। सामूहिक श्रम और उत्साह की वह भावना...